मारना गलत है तोह ज़रूरत से ज़्यादा प्यार करना भी गलत है

06 Mar 2018 #Parenting

मुझसे भी 9 साल बड़े मेरे बड़े भाई को मेरी बड़ी माँ ने ट्रेन में खींच के थप्पड़ मार दिया था । भैया ने जवाब नहीं दिया न ही गुस्सा हुए, ट्रेन की पूरी बोगी में थप्पड़ की आवाज़ सुन कर पहले ही शान्ति छा गयी थी, पर भैया एकदम कूल थे, उनको रत्ती भर फर्क नही था उस समय वो 25 के थे और आज वो 5 साल के बच्चे के बाप हैं पर उनका वही है कि माँ है, बुढापे में भी मारेगी तो पिटेंगे । जो भाई अब रहे नहीं उनको भी कभी सिगरेट पीता देख वो सुताई हुई खुल ए आम कि दुबारा करने की हिम्मत नही की कभी । मेरी माँ आज भी जब गुस्स्सा आता है तो वो मार देती हैं और मुझे कोई शर्मिंदिगी नही । मेरी माँ मुझे कभी सोर्री नही बोलती, न ही मैं आशा करती हूँ । उनका गुस्सा जब ठंडा होता है तो बस गले लगाती है । इस सब के बाद भी हम अपना हर विचार बताते हैं, कोई दब्बूपन नही है । ऐसा हमारे परिवार के सारे बच्चों के संग है । इनमें से एक भी किसी डिप्रेशन का शिकार नहीं है । मैं इसमें नही पडूंगी कि सही गलत, सवाल यह है कि क्या पेरेंट्स इंसान नही हैं, जिनको गुस्सा नहीं आ सकता, क्या बच्चा हमेशा बात से समझ ही लेता है । बच्चों के बेज़्ज़ती के माप दण्ड पेरेंट्स के मामले में इतने संकीर्ण क्यों होते जा रहे हैं, वही बच्चा ब्रांड न पहनने के ऊपर हुई कॉलेज में हंसी जवाब नही दे पाता । घर में शेर और बाहर सुसु करता है । मैं आये दिन ऐसे 12-13 साल के बच्चों को देखती हूँ जो पेरेंट्स के बदतमीजी करते रहते हैं और पेरेंट्स सहते रहते हैं । बच्चे माँ पिता के प्यार को टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं । मैं अपने छोटे भाई की भयंकर मार लगाती हूँ झाड़ू-डंडे से, इस सबके बाद भी अगर कोई पीठ पीछे बुराई करे तो अपोज़ करता है और हमेशा बोलता है कि 'दीदी मुझे मेरे भले के लिए स्ट्रिक्ट है' । ऐसा हम बच्चचों को क्यों नही सिखाते कि घर वालो के डांटने-मारने से कोई अपमान नही होता . अब अधिकतर माँ बाप अपने बच्चे की कोई शिकायत सुनते ही नहीं, उनको सिर्फ डिफेंड करते हैं । एक आंटी के घर गयी मैं, उनके पैर में दर्द हो रहा था, वो मेरे हमउम्र बेटे से कुछ लाने को कह रही थी और वो उनको बदतमीजी से मना कर रहा था । संवेदनहीनता कितनी बढ़ रही है । बात कृएल परेंट्स की नही हो रही बल्कि अधिकतर उन माँ बाप की हो रही है जो सबसे ज्यादा पाये जाते हैं । मारना गलत है तो हमेशा लल्लो चप्पो करना भी बेहद हानिकारक है । बच्चे पूछते हैं कि आपने मुझे मुझसे पूछ के पैदा नही किया था, मतलब इंसानी वैल्यूज़ कुछ भी नहीं ! बैलेंस भी कोई चीज़ होती है ! पेरेंट्स की जिम्मेदारियां निभाना पिछड़ा काम क्यों समझते हैं ? आज़ादी पूरी चाहिए तो सम्मान देना क्यों नही सीखते, मीठा मीठा हप्प और कड़वा कड़वा थू !! ( यहां पिटाई को सख्ती समझ लें)

-By ThatMate