प्यार के साइड इफेक्ट्स

06 Mar 2018 #Love and Relationships

प्यारी सिंगल लड़कियों, मुझे पता है कि यह वेलेंटाइन्स डे तुमको बहुत पकाता होगा, लोग पूछते होंगे फिर हसते होंगे, अंगूर खट्टे-फट्टे बोलते होंगे ! तो सुनो ध्यान से, यह सब हिही करने वाले लोग हैं गदहे ! ज़िन्दगी में कितने लोग हैं जो बढ़िया सिंगलहुड एन्जॉय करते हैं ? अधिकतर की ज़िंदगी तो बप्पी दा की आवाज़ में प्यार बिना चैन कहाँ रे गाते हुए निकल रही है जैसे मिंगल होने से बड़ा कोई काम ही नहीं जबकि यही ऐसा काम है जो सबसे आसानी से हो जाता है या करवा दिया जाता है । सिंगलहुड वैसे ही बहुत छोटी अवधि का होता है । सच पूछो तो ज्यादातर लड़कियां जल्दी प्यार अफ़्फोर्ड करने का रिस्क नहीं उठा सकती हैं, अगर घर छोड़ के फ़िल्मी स्टाइल में भागे भी तो होती है वही शादी और नौन तेल सिलेंडर ! मान लिया कि शादी या प्यार के बाद भी जॉब मिली पर जो फेज़ होता है जिसमे हम नए अनुभव बनाते हैं, खुद को प्यार करते हैं और सही में आत्मनिर्भर बनते हैं, खुद की संभावनाओं/आकांक्षाओं से वाकिफ होने के अवसर खो देते हैं । जिंदगी एक बार मिलती है, जिसे bfs बदलने में वेस्ट करना पाप है या एक ही को ही ढो कर खुद को खोना गलत । मानती हूँ कि यह भी हो कि कभी किसी से मिल कर लगे कि इससे बेहतर नहीं मिलेगा पर यह भी सोचो कि वो या उससे बेहतर मिल भी जाए और यह मौके और समय जो अभी हैं वो कभी नहीं लौटेंगे । कई लोग आएंगे तुमको बोलेंगे कि उनकी जिंदगी तुम्हारे बिना कितनी अधूरी है, तुम्हारे आई लव यू 2 बोलते ही उनकी ज़िंदगी में चमत्कार हो जायेगा, ऐसा कुछ नहीं होने वाला है । प्यार अनमोल होगा लेकिन यह बहुत टाइम consuming शय है, जब तुमको जल्दी से जल्दी करियर सेट करने की पड़ी होगी तब उस क्रूशियल दौर में तुमको ठग लेगा । एक और बात, यह दुनिया प्रैक्टिकल है, अपाहिजों के प्यार की कोई वैल्यू नहीं होती, समर्थ बनो, आज से बेहतर ऑप्शन्स मिलेंगे । रामायण यूँ तो कुछ स्त्री विरोधी है पर कई बातें बढ़िया लिखीं हैं उनमें से ही एक बात गाँठ बाँधने की है 'समरथ को नहीं दोष गोसाँई' अर्थात जो सशक्त होता है उसको कभी कोई दोष नहीं देता । कई बार तुम सुनोगी कि बिना प्रेम करे तुम नही समझ पाओगी, तो याद रखो, आँखें और दिमाग खुला रखना है, ज़रूरी नहीं कि अपने अनुभव से ही सीखो, दूसरे के अनुभव से सीखने वाला स्मार्ट कहा जाता है । जब दिमाग खुला होगा तब हम भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे कि कब दिल की आवाज़ है और कब यों ही क्षण भर का आवेश । ज़िन्दगी बहुत प्यारी चीज़ है, उसमें इस प्यार जैसे शब्द को इतना बड़ा स्पेस देना अन्य भाव सामग्रियों के संग नाइंसाफी है और खुद के साथ तो है ही । बाकी यह कि जो मन में आये करो, सानू की ????????

-By ThatMate