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06 Mar 2018 #Taboos

आजकल हम माहवारी सम्बंधित टैबूज़ को लेकर चर्चा करते हैं और इन को तोड़ भी रहे हैं, किन्तु यह सोचने की बात है कि यह टैबूज़ आये कैसे ? आज जब फ्री फ्लो को उत्साहित किया जा रहा है तो इसमें नया क्या है ? हम से 3 पीढ़ी अगर पीछे जायेंगे तो अधिकतर महिलाएं फ्री फ्लो से वाकिफ ही थी । घर का कोई कमरा या हिस्सा इसी परपज़ के लिए होता था जहां वो लेटी रहती थी । वो कोई कपड़ा-पैड कुछ इस्तेमाल नही करती थी, घर के हर शख्स को पता होता था और महिला के इनदिनों में पुरुष ही खाना बनाते थे अर्थात अगर कोई चर्चा नहीं थी तो कोई छुपाव भी नहीं था यह सामान्य बात समझी जाती थी । कपड़े का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में होता था । फिर महिलाएं बाहर निकलीं और इस क्रांति को बाजार ने भुनाया । खैर, जब हम एड देखते हैं किसी sanitary पैड्स ब्रांड का उसमें कपड़े की कई प्रॉब्लम्स दिखाई जाती हैं और उनके प्रोडक्ट को बढ़िया दिखाया जाता है । जबकि इन सब ब्रांड्स की manufacturing यूनिट्स में कई स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन किया होता है । एक नैपकिन में 80 प्रतिशत सामान प्रदूषित या संक्रमित होता है । उसकी खुशबु और सफा सफेदी देख कर हम उसे साफ़ मानते हैं । इन सबको हटा भी लें तो कुछ भी recyclable नही होता । भारत में माहवारी सम्बन्धी स्वच्छता की कमी है, उसे भरने हेतु सैनेट्री नैपकिन्स की पहुँच बढ़ाने की मुहिम चल रही है । पर असल में हम सब धरती को नुकसान पहुंचा रहे हैं । हर महीने अकेले हमारे देश में ही 60 लाख बिलियन से ऊपर माहवारी सम्बन्धी कचरा पैदा होता है जो कि सैनिटरी पैड्स और टैम्पून्स की देन है । सभी को देश के वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का हाल मालूम है, यह इस्तेमाल किये हुए प्रोडक्ट्स बीमारियां बढाने में अभूतपूर्व योगदान देते हैं । इन कन्वेंशनल पैड्स के जन्मदाता अमेरिका और यूरोप इस प्रदूषण से बचने के लिए महिलाओं को कपड़े के पैड्स के लिए उत्साहित कर रहे हैं । जहां हम सैनिटरी नैपकिन रिवोल्यूशन की बात कर रहे हैं, वही वे इससे मुक्ति के लिये मुहीम चला रहे हैं क्योंकि उन्हें इसके हानिकारक परिणाम डरा रहे हैं । अभी बाजार मे biodegredable पैड्स आ रहे हैं जो सस्ते हैं । री यूजेबल भी हैं लेकिन इनकी सफाई अच्छे से सम्भव नहीं है क्योंकि ये कई परतों में सिले हुए होते हैं जिससे उनको धूप नही मिलती । इसीलिए सिर्फ एक बिना सिला कपड़ा सबसे अच्छा ऑप्शन है, जिसके सारे फोल्ड्स को खोल कर में सुखाया जा सकता है । आप शायद कहेंगे कि यह आपकी दिनचर्या से मैच नही करता लेकिन अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे हैं तो अधिकतर बार सम्भव है कि आप के घर ऑफिस में टॉयलेट्स भी होंगे और जब ऐसा नही हो तो भी कई उपाय निकाले जा सकते हैं । मेरा यह सब लिखने का कारण है जो सबसे प्रमुख वो है पर्यावरण का दूषित होना , दूसरा यह सोचिये कि हम अपने दूसरे टैबूज़ में से निकल कर एक नए टैबू, (कपड़ा इस्तेमाल करने से परहेज ) में तो नहीं घुस रहे । जैसे wash जो कि एक ngo है एक रेड हट नामक पहल कर रहा है जिसमें वो औरते रहेंगी जो माहवारी से हैं !!! यह उस पुराने नियम से अलग कैसे हुआ, क्या यह अब पितृसत्तात्मकता को मॉड तरीके से सहलाना नही होगा !!! क्या हमारी जरूरतें बाजार तय कर रहा है ? हमें खुद और दूसरों को, संग पढ़ने, काम करने वालियों को प्रेरित और जागरूक करना चाहिए । इन सब को हटा कर भी सोचें तो इस धरती को हमें हमारी ओर से तो कुछ भार मुक्त करना ही चाहिए !!! (मैं इसे लिखने को ले कर कन्फ्यूज़्ड थी, इस झिझक के पीछे का कारण सम्भवतः मेरा आप से छोटा होना है ! यह भी हो सकता है कि हड़बड़ाहट में मैंने बिना तारतम्य सा लिख दिया हो, तो प्लीज़ गुस्सा नही करना बस मेरी मूल भावना को समझ लीजिएगा ।)