सफलता के पीछे माता पिता का हाथ

06 Mar 2018 #Parenting

सफलता के पीछे तमाम कारणों में एक कारण constant होता है,माता-पिता। अब इन माता-पिता ने प्यार से प्रेरित करके बच्चे को सफलता तक पहुंचाया हो(जैसे बल्ब वाले एडिसन की माताश्री) या कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए बच्चे के प्राण-पखेरू उड़ने से पहले उसे सफलता के दरवाजे पर पटक आये हो, ये अलग मसला है। दूसरी वैरायटी पर गाहे-बगाहे फ़िल्म बनाना अपने आमिर खान जी की हॉबी है।अगर बच्चे इस जबरदस्ती की सफलता से कालांतर में खुश हुए तो हम इस श्रेणी के बाप को कहते हैं सशक्तिकरण के ध्वजवाहक-श्री महावीर फोगाट, अगर बच्चे आगे चल कर दुखी हुए तो ऐसे पिता थ्री इडियट्स वाले कुरैशी साहब कहलाते हैं, जिनके हृदय परिवर्तन की कामना पूरा देश पॉपकार्न चबाते हुए करता है।इनपुट सेम है, आउटपुट अलग लेकिन एक बात तय -result will be कुछ सौ करोड़ की फ़िल्म and emergence of Mr. Perfectionist as Saviour. बहरहाल दुनिया में तमाम पिताओं के बीच एक ऐसे पिता है जिनके लिए मेरे दिल में बड़ी इज्जत हैं- पाँच बार world no. one रैंकिंग की मालकिन और टेनिस जगत में ग्लैमर का दूसरा नाम मारिया, के पिता यूरी शारापोवा। जब चार साल की मारिया को पिता के एक दोस्त ने तोहफे में पहली रैकेट थमायी तो उन्हें नहीं मालूम था कि वह उसे दुबारा छोड़ेगी नहीं। उसका जज्बा देख पहले तो यूरी खुद ही पार्क में प्रैक्टिस करवाते थे और फिर छह साल में एक रुसी टेनिस ट्रेनिंग सेंटर में नाम भी लिखवा दिया।जब वहाँ मारिया के टैलेंट को देखते हुए फ्लोरिडा के एक अकादमी जाने की सलाह मिली तो चर्नोबिल दुर्घटना में विस्थापित हुए इस खस्ताहाल परिवार ने वह सलाह भी मान ली।उधार के सात सौ डॉलर के साथ बिना ढंग से अंग्रेजी की दो लाइन जाने, अपनी छः साल की बेटी को लेकर एक अनजान देश पहुंचने का पागलपन बस यूरी ही कर सकते थे।वीजा समस्या कि वजह से माँ नहीं जा पायी। अमेरिका पहुंच कर मारिया का सपना पूरा करने के लिए यूरी ने बर्तन धोने से लेकर पोछा मारने तक का वह हर काम किया जो वह कर सकते थे। एकादमी में मारिया को एडमिसन मिला और फिर स्कालरशिप भी आया पर जिंदगी आसान नहीं थी।रूस के प्रति अमरीकियों की जन्मजात चिढ़ का असर यह था कि दस घण्टे कोर्ट में पसीना बहाने के बाद मारिया शारापोवा अपने बिस्तर पर जाकर गिर नहीं सकती थी, जब तक कि वह डॉरमेट्री की बाकी तमाम सीनियर लड़कियों के बिस्तर लगाने से लेकर उनके बाकी छोटे-मोटे काम ना कर दे।पर एक आम इंसान और चैम्पियन के बीच का फर्क था कि तमाम bullying से टूटने के बजाय मारिया ने उनसे सीख कर खुद को और बुलन्द बनाया।सबसे कम उम्र में जूनियर चैम्पियनशिप जितने का रिकार्ड यूँ ही दर्ज नहीं होता ना।पूरा करियर चोटों से भरा हुआ है लेकिन 2003 से 2015 तक कोई एक साल नहीं रहा जब किसी एक टाइटिल पर इसने नाम ना दर्ज किया हो। हालिया डोपिंग विवाद हुए है पर क्रिटिक्स इस बात पर आश्चर्य जरूर जताते है कि इतनी injuries के बाद यह लड़की इतना लम्बा करियर खेल कैसे गई?मुझे लगता है खेल गयी क्यूकी एक सपनों के पीछे पागल लड़की को उड़ान देने के लिए एक सनकी बाप का हौसला था।

-By ThatMate