सुनवायीदौरान

 

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हमारे देश की
लोकतांत्रिक कचहरी में
काले लबादों के बीच
जब भी/प्रायः मुकदमों में
बलात्कार की सुनवायी
होनी होती है
बहुत ही भद्दे, बेहूदे
और वाहयात किस्म के
प्रश्न पूछे जातें हैं०

क्रमानुसार देने होते हैँ
पीड़िता को सारे जवाब
प्रदर्शित करने होतें हैं
हर एक जख्मी अंगों को
दिलाने होते हैं एहसास
सिहरनों के
दर्ज करानी होती है
सिसकियों की गिनतियाँ
रेपिस्टों की संख्या
और वस्त्रों की बारिकियाँ०

इस प्रकार
फिर एक बार किया जाता है
आभासी बलात्कार
पीड़िता के साथ
न्याय की काली कोठरी में०

और फिर
सुनवायी की
अगली तारीख पर
रिहा कर दिया जाता है
बलात्कारियों को
चश्मदीद के अभाव में
और वो चल पड़ते हैं
स्वच्छंद वा उन्मुक्त
नये शिकार की खोज में०

–परितोष कुमार ‘पीयूष’

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