मुझे किसने लूटा!

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कैसे कहूँ
मुझे किस-किस ने लूटा
मुझे तो
अपने ही घर ने लूटा०

शर्म आती है मुझे कहने में
कहाँ से शुरू करूँ
कब से शुरू करुँ
पिता से शुरू करुँ
या पति से०

बचपन से शुरू करुँ
या जवानी से
मुझे तो पहले
सभी अपनों ने लूटा०

फिर कभी
अँधेरी गलियों ने
तो कभी
सूनसानों ने लूटा०

सुबह मंदिर ने लूटा
शाम मीडिया ने लूटा
नुक्कड़ की आँखों ने लूटा
चौराहे की मुस्कानों ने लूटा०

खेतों ने लूटा
खिड़कियों ने लूटा
बर्दी ने लूटा
लबादों ने लूटा०

चली तो सफर ने लूटा
सोयी तो सपनों ने लूटा०

मत पूछो
किस-किस ने लूटा
मुझे तो धरने में
अपने ही कॉमरेडों ने लूटा०

किस-किस का नाम लूँ मैं
मुझे तो अवसरों ने लूटा०

-Paritosh Piyush

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