Let's talk - ThatMate

On Depression Let’s talk tomorrow

वो लोग होते है ना जिनसे मिलके आपको लगता है जिंदगी कितनी ख़ुशगवार है, कितने तरीके है इस जलजले में खुशियां देखने के। वो लोग होते है ना जिनसे मिलके आपको उनको छिछलेपन पे हंसी भी आती है, जिनके हंसोड़ और हर बात की गम्भीरता कुरेद के निकाल देने की आदत पे कभी गुस्सा आता और कभी प्यार। वो लोग होते है ना जिनसे आप तब सीखते है जब आप ढर्रे पे चलके बहुत दूर निकल जाते है, खुद को भूल जाते है, ऐसे रेस में कोई गर आपको सड़क किनारे कड़ी धूप में “हर फिक्र को धुएं में” गुनगुनाता हुआ मिल जाये, ऐसा था वो। वो लोग होते है ना जैसा दोस्त सभी चाहते है, लेकिन कोई वैसा बनना नही चाहता। बिल्कुल ऐसा, थोड़ा ज्यादा होगा बेफिक्र, कम तो बिल्कुल भी नही, रत्ती भर भी नही।

7-8 साल से जानता हूँ उसे, या यूं कहें हर दिन उसको जानने की तलब होती है और हर बार ये कशिश अधूरी रह जाती है। कुछ तो होगा जो बांध के रखता होगा उसे दुनिया के वास्तविकता, भागदौड़ से इतना दूर फिर भी वही शांति जैसे समंदर किनारे कोई सुबह की शुरुआत। एक बार पूछा था मैंने
“यार तू इतना गंभीर है, लोगो के सामने ऐसा क्यों रहता है जैसे तेरे में कोई गहराई ही ना हो?”
वो हंसने लगा और बोला “तू नही समझेगा!”
“मैं नही तो और कौन समझेगा तुझे” मैने दोस्ती का कार्ड फेंक दिया था।
“शायद कोई नही”
उससे बहस में जीतना नामुमकिन था तो मैंने अपनी सीमाएं ज्यादा नही खींची। लेकिन एक बार उसकी डायरी का एक पन्ना छुपके पढ़ लिया था, मेरा जवाब और दुनिया का जजमनेट उस दिन के बाद कही काफूर हो गया था। लिखा था

” इंसान की शख्शियत नारियल सी होनी चाहिए। पहले बहुत रूखा सा हिस्सा, जिससे आप प्यार शायद ही करें। कोई अगर आपकी शख्शियत में रुचि रखता है या फिर करने लायक है तो उसे अगले परत का इंतज़ार करने का धैर्य होना चाहिए। गर नही तो आप बेहतर लोग नसीब रखते हैं। जिस किसीने आप पे अपनी ऊर्जा, समय और विश्वास इन्वेस्ट नही किया, उसे आपके उजले और मीठे सतह को देखने का हक नही। गर सबको आप अपना वो फेस दिखाएं तो उसके खुरच जाने का बड़ा खतरा है, ख्याल रखना!”

अपने आज में बस आज ढूँढनेवाले उस लड़के से मिलने की बड़ी ख्वाहिश थी इस बार जो घर मैं लौट तो। करीब साल भर पहले मिला था उससे। मोबाइल वगैरह ना रखना थोड़ी गरीबी थी, थोड़ा फक्करपना, तो कोई तरीका नही था मिलने की बजाय। घर आके 2-4 दिन तो बिस्तर पे यूँही कट गए, एक शाम मैने उसके भाई के नंबर पे फ़ोन लगाया और बातचीत शुरू हुई तो उसने दूसरे लाइन में ही बोला
“यार, कल बात करें” आग्रह के बोझ में दबी आवाज़ थी।
“बिल्कुल” मैं भौचक्का था।

एक लड़का जिसने कभी भी किसीको किसी बात के लिए ना नही कहा था, आज वो बात नही कर रहा मुझसे, ऐसी क्या बात हो गईं अचानक। उसकी आवाज़ को क्या हो गया था। सारी ऊर्जा, हंसी जिसका मैं और सब कायल थे, वो गुम हो गया था। बहुत उदासी थी फ़ोन के उस तरफ, जैसे भूकंप आया हो। मेरा मन घबरा सा गया था, नकारात्मकता के सारे समीकरण खंगाले जा रहे थे। अगले दिन का इंतज़ार अब मुश्किल हो रहा था।

P.s: कहानी नही है ये, सच है हंमारे आपके समाज का। एक ऐसी बीमारी, जिसको हम बीमारी ही नही मानते, आइये उसके बारे में बात करते हैं, बात से ही तो बात बनती है। जल्दी ही हाज़िर हुआ अपने दोस्त के साथ।

#dedicatedtoallfighters
#youaremyhero
#acknowledgefirstfightlater

Kumar priyadarshi

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