Category Archives: Child Abuse

sexual assault के असर से निकलने के लिए क्या करें ?

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मैं करीब चौथी-पाँचवी कक्षा में थी।हमारा परिवार बड़ा था।बड़े आँगन वाला जिसमें कई चाचा और भाई रहते है। एक शाम जब अपने रिश्तेदारों के साथ बैठ कर टीवी देख रही थी तो मेरे ऊपर मुझे एक हाथ महसूस हुआ। वह स्पर्श इतना घिनौना था कि शायद मैं उसे कभी शब्दों में समझा ही ना पाऊँ।मेरे भाई-बहन और चाची मेरे बिल्कुल आगे बैठी हुई थी और मैं सबसे पीछे।वो देख भी नहीं पाये कि मेरे साथ क्या हो रहा था और मेरे गले से आवाज निकलना तो दूर, मेरी साँस तक रुक गयी थी।उसके बाद जो दौर शुरू हुआ वह कई दिनों का था और उसकी वजह से पड़ा मानसिक असर, सालों का।

Child sex abuse का सामना मुझे इसलिए नहीं करना पड़ा क्यूकी मैं एक लड़की थी, यह लड़को के लिए भी उतनी ही बड़ी समस्या हैं। हम समाज को इनसे बचने के लिए जागरूक तो करतें हैं पर यह बताने से चूक जातें हैं कि जिंदगी को वापस पटरी पर कैसे लाया जाये? सच्चाई यह है कि ज्यादातर को मालूम भी नहीं हैं। और सही तरीके से डील नहीं करने की वजह से इसका असर ज्यादातर पीड़ितो के व्यक्तित्व पर पूरी जिंदगी रहता हैं।अगर आप आज तक इसके असर से नहीं निकले हो तो कुछ बातों पर ध्यान दें –

1. यौन शोषण का एक बहुत बड़ा असर होता हैं- अपने शरीर से नफरत करने लगना।मुझे याद हैं मैंने घण्टों नहाना शुरू कर दिया था।मेरे परिवार को लगता था कि मुझे साफ-सफाई से obsession हो गया हैं।वो मुझे इस चीज के लिए समझाते थे और कई बार डाँट भी देते थे पर उन्हें समझ नहीं आता था कि मैं अपने शरीर के साथ बहुत uncomfortable हो चुकी थी।इस घटना का मानसिक पीड़ा इतनी ज्यादा होती है कि बहुत से बच्चे इस मानसिक पीड़ा से ध्यान हटाने के लिए खुद को शारीरिक पीड़ा देना शुरू करते हैं।कई मामले मैं जानती हूँ जहाँ बच्चे अपने हाथ-पैरों पर ब्लेड चला लेते है, खुद को माचिस से दागते हैं। अगर आप अपने शरीर से नफरत करते है तो दिमाग में इस बात को बैठाने की कोशिश करें कि यह नफरत पूरी तरह illogical हैं।ना तो यह शरीर गन्दा है ना आप अपवित्र। इस शरीर को अपनाना और इस से प्यार करना आपको सिखना ही पड़ेगा। You don’t have any other option.

2. लोगों में एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि बच्चे माता-पिता को इसीलिये नहीं बताते क्यूकी हमारे समाज में सेक्स ढका- छुपा विषय है या हम खुले विचार के नहीं हैं।झूठी बात है यह।मेरी परवरिश कभी भी पारम्परिक भारतीय तरीके से हुई ही नहीं।मेरे घर में हमेशा से ऐसा माहौल रहा कि मैं इन विषयों पर खुल कर बात कर सकती हूँ और करती भी हूँ।मैं पापा से अपने पीरियड डिस्कस कर लेती थी पर यह घटना बताने में मूझे छह साल का समय लगा।यह है ही इतनी सेंसिटिव बात।अगर आप इस गिल्ट में हैं कि उस वक्त आप विरोध नहीं कर पाये या आप अपने पैरेंट्स को बता कर बच सकते थे, तो यकीन मानिये यह आपकी गलती नहीं थी।आप उस अनुभव से गुजरने के वापस खुद को खड़ा करने की कोशिश कर रहें हैं यह साबित करता है कि आप बहादुर हैं।बहुत से बच्चे झेल ही नहीं पाते और समाज को लगता है कि पढ़ाई के दबाव में या प्यार में धोका खा कर बच्चे ने जान दे दिया।उन्हें कभी नहीं पता चलता कि वह जिंदगी से इसीलिये हारा क्यूकी वह रात भर डर से सो नहीं पाता था और दिन में उसे कभी किसी ने बताया ही नहीं कि वह इस भयानक जिंदगी को बदल सकता हैं।

3.अगर मेरा यह पोस्ट कोई ऐसा बच्चा पढ़ रहा है जिसके साथ ऐसा कुछ हो रहा है तो मैं कहूँगी आपका अपराधी उतना डरावना नहीं है जितना वह खुद को दिखाता है।I know उसने आपको जान मारने से लेकर तमाम धमकी दी होगी, मुझे भी दी थी।मैं अपने पैरेंट्स से बात भी करने जाती थी तो वो गुस्से में घूरता हुआ वहाँ खड़ा होता और मैं शुरुआत के कई दिनों तक एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं कर पायी थी।पर फिर मैं चिल्लाई और विरोध किया।अगर आप चाहते हैं कि आपके साथ जो हो रहा है वो बन्द हो तो आपको चिल्लाना पड़ेगा पूरी ताकत से।सामने वाला इंसान बहुत डरपोक है और अगर आपने उसे यह जता दिया कि आप अब आर-पार की लड़ाई करेंगे, आप सबको बताएंगे, तो वह तुरन्त पीछे हटेगा। Don’t make d mistakes I did, अपने पैरेंट्स को बताये, दोस्तों को बताना शुरू करें, टीचर्स को बताये, हर उस इंसान को बताये जो आपकी थोड़ी भी मदद कर सकता हैं।मुझे मालूम है ऐसी घटनाये समाज से बच्चे का भरोसा पूरी तरह हिला देती है, पर यकीन माने- मदद मिलेगी अगर आप मदद मांगेगे।

4.पुरुष हो या स्त्री इन घटनाओं का असर सालों बाद तक रहता हैं।एक बहुत बड़ा डर होता है कि कल को हमारे पार्टनर को पता चला तो उसका रिएक्शन क्या होगा?
A.पुरुषों को बताने में डर लगता है क्यूकी कहीं ना कहीं यह बात उनकी मर्दानगी को ठेस पहुंचा रही होती हैं।कई बार इस inferiority complex की वजह से खुद को साबित करने के चक्कर में ये पुरुष और ज्यादा aggressive व्यवहार दिखाने लगते हैं।In fact यौन शोषण में बहुत से अपराधी ऐसे होते है जो बचपन में खुद भी पीड़ित रहें हैं। आपकी मर्दानगी का इस बात से कोई लेना-देना नहीं हैं।अपने यौन शोषण को कभी भी गलत तरीके से डील करने की कोशिश ना करें।
B.महिलाओं में एक बहुत बड़ा डर होता है कि उनको समाज नहीं अपनायेगा,शादी नहीं होगी, या बॉयफ्रेंड छोड़ कर भाग जायेगा।इस बात में बहुत कम सच्चाई हैं और दुःखद है कि इसका ढिंढोरा कई so-called नारीवादी कमीने ज्यादा पिटते हैं।वो ऐसा दिखायाएंगे की समाज पीड़ितो के गर्दन के पीछे ही पड़ा रहता हैं।अगर आप सिर ऊँचा करके चलना जानती है तो समाज आपको मजबूर नहीं करेगा निचे देखने के लिए।We are not in Afganistan.अपने अनुभव से साफ बता सकती हूँ गाँव हो या शहर मुझे ऐसे बहुत से लोग मिले है जो कभी मुझे मेरे अतीत की वजह से गलत नहीं मानते।
And moreover थोडा चौड़ में जीना सिखे,”जो जज करेगा, वह उस लायक भी है कि आप उससे सीधे मुहँ बात करें??रिश्ता तो दूर की बात हैं।”

5.अगर अभी भी आपको कोई मानसिक समस्या आ रही है(eg. many times victims are scared of sex or even touch) तो बेझिझक किसी मनोवैज्ञानिक से मिले।इसमें शर्म वाली कोई बात ही नहीं हैं।मदद मांगने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप abnormal हैं या कमजोर हैं।यहाँ मैं आपको सावधान कर दूँ कि जरूरी नहीं है कि आपका अनुभव अच्छा होगा।हो सकता है कि वो आपकी समस्या सुनने के बजाय आपको antidepressant और नींद की गोली थमा कर भगाने की कोशिश करें।जब मैंने एक काउंसलर से पहली बार बात किया तो उसका पहला वाक्य था,”कही ऐसा तो नहीं कि तुमने पढ़ाई से बचने के लिए अपने दिमाग में इस चीज की कल्पना की हो?” मेरे दिमाग का पहला विचार था कि अब सैंडल उतारो और इस औरत को हॉस्पिटल में घसीट कर मारना शुरू करों।खैर, हर क्षेत्र कि तरह यहाँ भी गधे भरे पड़े हैं तो हो सकता हैं कि आपको अच्छा काउंसलर ढूंढने में थोडा समय लगें लेकिन इसकी वजह से हार ना माने। A good counselor is a life changing machine for you.

6.आप अगर अपने अपराधी से क़ानूनी लड़ाई लड़ पाते हैं तो बहुत अच्छी बात हैं।आपको हजारों सलाम।
पर ज्यादातर विक्टिम नहीं लड़ पाते क्यूकी एक तो उनकी उम्र बहुत कम होती हैं या जब अपराधी करीबी हो तो परिवार कानून तक नहीं पहुंचाना चाहता।आपको जिंदगी में ऐसे कई दोगले लोग मिलेंगे जो आपको ब्लेम करेंगे कि आप अब बड़े होने के बाद FIR क्यू नहीं कर रहें? इनमें से ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो अपने क्षेत्र के विधायक को नहीं पहचानते होंगे,आजतक एक RTI फाइल नहीं की होगी,लड़ने के बजाय घुस देकर सरकारी ऑफिस में काम निबटा आयेंगे लेकिन आपसे उम्मीद करेंगे कि आप बहादुरी दिखाएं।ऐसे हवा पहलवानों को दूर से ही हाँक दीजिये।इन्हें एक बहुत बेसिक सी बात नहीं समझ आती कि child sexual assault बहुत अलग होता हैं adult sexual assault से।अपराध एक ही तरह का है पर असर बहुत अलग।बचपन की चीजों का असर बहुत लम्बा होता है क्यूकी उस वक्त हमारा व्यक्तिव विकसित हो रहा होता हैं।हम उस चीज को भूल कर आगे निकलना चाहते है और ज्यादातर मामलों में सम्भव नहीं होता कि हम अपनी जिंदगी भविष्य या करियर से हटा कर कोर्ट-कचहरी के चक्कर में लगाये।

7. लोगों की एक समस्या होती हैं ऐसे मामलों में छाती पीट कर पीड़ितों के सामने साबित करने की कि वे दुनिया के सबसे सेंसिटिव लोग हैं।एक कड़वी सच्चाई बता देती हूँ – अगर आप इन लोगों के चक्कर में पड़े तो जिंदगी में कभी खुश नहीं रह पाएंगे।या तो आप sympathy ही लेते रह जायेंगे उम्र भर या ऐसे बन जायेंगे कि आपसे ज्यादा emotionally strong और कोई नहीं होगा। Choice is totally yours. पर दोनों में से कोई एक ही रास्ता अपना सकतें है आप।अगर दूसरे नम्बर का व्यक्तित्व चाहिए तो खुद को दया का पात्र समझना बन्द करें।आपके साथ बहुत बुरा हुआ पर दुनिया में बहुतों के साथ बहुत बुरा हुआ।Look at them and stand strong. Don’t be with the sympathizers but be with the fighters..यह बात अगर मैं अपना पूरा इतिहास बताये बिना किसी को समझाने की कोशिश करती हूँ तो कुछ बेवकूफ लोग हमेशा समझाने आते हैं,”आपको जिंदगी आसान लगती है क्यूकी आपकी किस्मत अच्छी रही हैं।”
“नहीं मुझे जिंदगी आसान लगती नहीं हैं, पर उसे आसान बनाना सीखती हूँ मैं।” कई औरतें मुझे ऐसी मिली हैं( especially on FB) जिनका साफ मानना हैं कि किसी के साथ ऐसा हुआ हैं तो उसे नकारात्मक होना ही चाहिए समाज के प्रति।ये लोग पूरी तरह लूजर एटिट्यूड वाले लोग हैं जो सिर्फ आपको जिंदगी भर रोना सिखाएंगे।अगर खुद को पीड़ित के स्टेट्स से ऊपर नहीं मानेंगे तो कभी खुल कर जी नहीं पाएंगे।जिनको अपनी तकदीर लिखना नहीं आता बस वहीं किस्मत को कोसतें है वरना बलात्कार भी ऐसी चीज कतई नहीं हैं जो जिंदगी बर्बाद कर दे।

8. आप पीड़ित हैं और एक टूटे हुए इंसान हैं तो जो बात मैं अभी कह रहीं हूँ 99.99% चांस है कि आपको गुस्सा दिलाएगा। आप मुझे गालियाँ देना चाहेंगे और शायद थप्पड़ मारना भी। आपको उस अपराधी को एक चीज देनी पड़ेगी जिंदगी में आगे बढ़ने के पहले -माफ़ी। भले ही आप उससे क़ानूनी लड़ाई लड़ते रहें और उसे सजा दिलवायें पर जिंदगी के किसी मोड़ पर जाकर उसे माफ़ करने की कोशिश करें।एक सच्चाई बताती हूँ- वह इंसान आपकी माफ़ी डिजर्व नहीं करता।वह आपके सामने खड़ा होने लायक भी नहीं हैं।पर माफ़ करना इसलिये जरूरी हैं क्यूकी अगर आप उसके लिए grudge पाल कर रहेंगे तो अतीत को कभी भुला नहीं पाएंगे।बहुत हिम्मत का काम हैं यह।जरूरी नहीं हैं कि यह काम आप आज करें। Maybe after few weeks,months or years..Take your time but ultimately let go of that person for forever..यह सिर्फ मेरा खुद का अनुभव नहीं हैं, जो लोगों इस त्रासदी के बाद भी बिना अतीत का कोई दुष्प्रभाव लिए अपनी जिंदगी ख़ुशी से जी पा रहें हैं उन्हें अपने अंदर के नफरत को मारकर एक नयी शुरुआत करनी पड़ती हैं। वरना उस इंसान ने हमें शायद एक महीने सताया हो पर उसका दुःख हम पूरी जिंदगी ढोते हैं।
Get out of the terrible past and have a beautiful future which you deserve..

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Megha Maitrey: A psychology student from Bihar.., doing my graduation..a writer in making..and a thinker!

MMS, Sex Chat, nude तस्वीरों के कारण ब्लॅकमेल होने पर क्या करें ?

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हमारे समाज की बनावट कुछ ऐसी है कि परिवार का नाम लड़के भी उठाते-डुबाते हैं, पर जब “घर की इज्जत” का टेंडर निकलता है तो मुख्य दावेदार हम लड़कियों को ही माना जाता है(बिना हम से पूछे)। इसके कई प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष प्रभाव है पर मैं यहाँ एक बात पर फोकस करूँगी- ब्लैकमेल।आपने अपने जीवन में कई घटनाएँ पढ़ी-सुनी होंगी जब किसी पुराने आशिक के ब्लैकमेलिंग से तंग आकर लड़की जान तक दे देती है। And I am very sure कि आप ऐसी कुछ घटनाओं के करीबी साक्षी भी रहें होंगे।जब कोई दो व्यक्ति रिलेशनशिप में होते है तो कुछ तस्वीरों की अदला-बदली होती है, कुछ मसालेदार स्क्रीनशॉट बनने लायक बातचीत होती है, और हर कपल के बीच होती है।पर जिस पार्टनर पर आपने भरोसा किया वह हद दर्जे का लुच्चा निकला तो?? ऐसे में जिंदगी अचानक नर्क से बदतर लगने लगती है।भरोसा टूटने और बदनामी की दोहरी मार झेलना मुश्किल है,नामुमकिन नहीं।अगर आप ऐसे किसी दौर से गुजर रही हो और दिमाग काम करना बन्द कर रहा हो तो जिंदगी वापस पटरी पर लाने के लिए इन बातों पर ध्यान दें

1. सबसे पहले तो रोते-धोते हुए माँ-बाप के चरणों में लोट जाये।वो खुश नहीं होंगे और शायद आपको दो-चार चप्पल भी लगाये, पर ऐसे नाजुक समय में पैरेंट्स के लात-घूंसे आशीर्वाद समझ कर ग्रहण करें बिना चूँ-चा किये।उनसे अपनी समस्या छुपाइये मत।याद रखियेगा, अपने देश के 90% माँ-बाप की बीपी बढ़ जाती है बेटी के प्रेम- प्रसंग सुन कर पर 95% माँ-बाप वैसे होते है जो अपने बच्चे पर मुसीबत आने से पहले अपनी जान लगा देंगे।

2.सलाह-मशवरा के लिए ऐसे किसी दोस्त के पास तो भूलकर भी ना जाये जिनकी पुलिस,कोर्ट, मुकदमा, कट्टा,ब्लैकमेलिंग जैसे शब्द सुनते ही फटती हो।होगा यूँ कि वो पिछले तिन सौ साल के “सनकी आशिक के बदले का अंजाम” पर सारी केस हिस्ट्री निकाल कर आपके सामने पटक देंगे और जो लड़का अभी तक आपको बस आले दर्जे का कमीना लग रहा था, वह कोलम्बिया के माफिया का सगा भाई लगेगा।मने आप जायेंगी anxiety में और वापस आयेंगी suicidal होकर।

3. चुप बिल्कुल ना रहें।अपने दोस्तों को बतायें।कुछ पुरुष मित्रों को तो जरूर बताएं।होता यूँ है कि हम लड़कियाँ होती हैं थोड़ी मुलायम दिल; मार-पीट, हल्ले-हंगामे से दूर।ऐसे में जब सामने वाला कहता है-तेरे साथ फलाना-ढिमाका कर दूँगा, तो हम अक्सर उनकी बातों में आकर उनके चार पैसे की औकात को एक रुपया जोड़ लेती हैं।ऐसे में किसी लड़के से निबटने के लिये लड़को का अनुभव और ज्ञान बड़ा काम आता है, क्यूकी एक हारा हुआ आशिक कितना फेंकता है यह एक लड़के से ज्यादा अच्छा आपको कोई नहीं बताएगा ।वैसे भी अगर लाठी चलाने की नौबत आ गयी तो आपकी अपनी सेना भी तो होनी चाहिए?

4.कभी भी प्यार-मोहब्बत के चक्कर में दोस्तों को नजरअंदाज ना करें।यह सबसे common mistake है जो मैंने लोगों को करतें देखा है।आठ घण्टे फोन पर लगे रहेंगे पर महीने में एक बार अपने पुराने साथी से मिलने नहीं जाएंगे।अवसाद के लिए “दोस्ती” से ज्यादा अच्छी मनोवैज्ञानिक थेरेपी अभी पैदा हुई नहीं है।तो ऐसे कुछ दोस्त जरूर कमायें जो बुरे समय में आपके साथ हो।

**** अब इन तमाम बातों के बाद अगर आपका MMS मार्केट में उतर ही आया तो?? तो पाँच बातें गांठ बाँध लीजिये-

1.आपकी दुनिया खत्म नहीं हुई है।”पब्लिक की मेमोरी बड़ी कमजोर होती है”, यह प्योर राजनितिक लाइन है लेकिन बिल्कुल सच्ची।याद है क्या आपको DPS वाली लड़की का नाम या चेहरा जिसकी MMS देश के हर न्यूज चैनल पर प्राइम टाइम की बहस बन गयी थी? वक्त हर जख्म भर देता है इसलिए घबराहट में बौखला कर खुद को क्षति ना पहुँचा बैठे।

2. एक बात तो दिमाग में फिट कर लें,”हमारे देश का समाज औरतों के लिए बुरा हैं, कानून मर्दों के लिये”।इस देश ने औरतों को इतनी ताकत दी है कि अगर एक औरत यहाँ ताल ठोककर मैदान में उतर आयें तो इंद्र का सिंहासन काँपता है और यमराज का भैंसा भी पूँछ उठाकर भागता है।

3.अब जब आप दुनिया के सामने नंगी हो ही गयी है तो लाज-शर्म को उठा कर पटकियें एक तरफ और आ जाइये सोशल मिडिया पर। हर सेलेब्रेटी ट्विटर एकाउंट से लेकर fb तक पर मदद की गुहार लगाइये।कोई तो आप पर ध्यान देगा, इतने पर बात ना बने तो बहुत सरकारी ऑफिस है।जमा दीजिये धरना।उस कमीने को अब छोड़ना नहीं है।

4.अब तक आपको ‘रण्डी’ साबित किया जा चूका होगा।इस शब्द के डर से छुपीये मत।जब कोई आपकी रण्डी का सर्टिफिकेट बांटता है तो वो automatically आपको authority दे चूका होता है उसके so- called मर्दानगी की सर्टिफिकेट का।पर हम लड़कियाँ इतना घबरा जाती है कि यह बात दिमाग में आती ही नहीं। शब्दों का महत्व तभी तक है जब तक आप पर उसका असर। 5.सबसे जरूरी बात- हमारें देश में कमियाँ जरूर है, पर यह मरा नहीं है।आज भी यहाँ ऐसे तमाम लोग है जो एक औरत की मदद के लिये खुद को खतरे में डाल देतें हैं,तमाम लड़कियां है जो आपके लिए जंतर-मन्तर पर लाठी खायेंगी, तमाम लड़के है जो आपको बहन मान कर आपके लिये बड़ी से बड़ी मुसीबत से भीड़ जायेंगे।समाज को साथ लेकर चलें और इसपर थोड़ा भरोसा रखे।आप आवाज लगाइयेगा, वादा है हम आपके पीछे खड़े मिलेंगे। तो बस don’t give up. और बाकियों से कहूँगी कि अगर ऐसा कुछ देखने को मिले तो कम से कम भावनात्मक सपोर्ट जरूर दें।हो सकता है वह लड़की बहुत बड़ी बेवकूफी कर गयी हो लेकिन उसका सेक्स चैट और न्यूड तस्वीर भी भरोसे की वजह से था और भरोसा करने के लिए कोई भी इंसान ब्लैकमेल होना डिजर्व नहीं करता।

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Megha Maitrey: A psychology student from Bihar.., doing my graduation..a writer in making..and a thinker!

Child Sexual Abuse: Myths and Facts

What is Child Sexual Abuse?

A child or young person is sexually abused when someone in a position of power or authority takes advantage of a person’s trust and respect to involve them in sexual activity.

Once upon a time

There was a little girl in yellow frock

She was going to a bakery for her morning tea

She saw a pack of dogs were running free

Just then a 40ish man came to help her , u see !

On the way , he tried to kiss her , shamelessly

She cried and cried , and ran to her home hurriedly

That day she made a pledge

Never to fear a dog – human or animal whatever it be

Once upon a time

There was a little girl in yellow frock

That little girl was me    

Why should I be concerned about it?

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  1. 19% of the world’s children live in India, which constitutes 42% of India’s total population.
  2. Every 2nd child in India is sexually abused.
  3. India has the world’s largest number of sexually abused children, an astonishing 69%, or 276 million children
  4. 50% of cases of abuse are by persons known to the child or in a position of trust and responsibility.
  5. In one study, child sex abuse is at least 10% more among boys than girls.
  6. 70% of abused children never report the matter to anyone.
  7. A child is molested every 30 minutes in India

Living as a sexually abused child

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Children who are getting abused

  • Irrational Anger
  • Too much fear/attachment with the abuser
  • Prefer to be alone
  • Sudden change in behavior
  • Live in fear
  • Show some emotional signals
  • Undergo physical Changes

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Victims who were abused in childhood and are adults now

  • Feel victimzed their entire entire life
  • They make have depression or OCD
  • They feel they did something wrong and deserved it
  • Suicidial
  • Drug/medication abuse
  • Struggle in their future relationships

 Refuting myths and perceptions surrounding CSA

Child sexual exploitation is something that is done to girls and young women. Boys are victims too. May be they get reported less than girls.
It only happens in certain dysfunctional families or ethnic groups. Perpetrators come/target from a variety of ethnic and cultural backgrounds.
Sexual Offenders are easily identifiable. They look like ‘one’. That ‘Lawyer Uncle, ‘Bostonwale mamaji’ anyone, ANYONE can be an abuser!
They are mostly strangers. 90% times abusers are known to the families.
Good girls never get abused. Too much ‘western culture’ is doing this to us. Molesters are not culture conscious. They lurk for the opportunity to molest.
It is mother’s failure if the child is abused. She didn’t protect her child well. Majority of the reported abuse incidents are from single-mother families.
Child Sexual abuse is less prevalent in rural areas or elite groups. It is widespread in India across cities & villages affecting rich and poor equally.
If I will report the sexual abuse, my child’s reputation will be tarnished. Sexual Offenders know this sentiment so well and this makes them fearless.  Adopt ‘Name and Shame’ policy. Remember it is the abuser who should be ashamed and not the child.
It is better for my children to have minimum exposure to outer world to avoid these abuses. Restricting their childhood can hinder their social and mental growth.

 

Preventive actions by parents and educators:

  • Call a spade a spade! Don’t nickname private body parts.
  • Teach children right body anatomy.
  • Explain children difference between fear and respect. Don’t fear your elders! Say No when you feel uncomfortable.
  • Parents trust your gut. If you are uncomfortable in a company, definitely your child will be.
  • Parents can tell stories related to sex education to their children which they can relate to. You know your child better. No flyer or poster can convey message better than you!
  • Pre-screening of all people working with Children (at home/school/day-care, Juvenile centres etc.).
  • Talk about the abuse. Tell your child what happened isn’t he/she fault.

Know your Legal Rights:

Protection of Children against sexual Offences Act , POSCO (2012) India.

  • The said Act defines a child as any person below eighteen years of age, and defines different forms of sexual abuse.
  • The said Act prescribes stringent punishment graded as per the gravity of the offence, with a maximum term of rigorous imprisonment for life, and fine.
  • The act incorporates child friendly procedures for mechanisms for reporting, recording of evidence, investigation and speedy trial of offences through designated Special Courts.

 

‘We all must bring our own light to the darkness’ – Charles Bukowski

Sheetal Zaroo

Another incident of Child Abuse

17th August, 2016,

On my way back to Dhanbad from Kolkata, I happened to travel in general class, which was packed with people. The reason could be of Raksha Bandhan, a festival where the brother shows love for his sister and pledges to protect her. As the Durgapur station approached  I noticed something unusual.
A family with a mother and her four kids (3 boys and 1 girl) were on board. They somehow, caught my attention. The elder boy who was around 15-16 yrs of age was  was more inclined towards his younger sister and wasn’t paying attention towards other kids. Every move he made was to grab her face or to kiss her lips, sooner he started repeating it.  The girl child who was about 6-7 years old was trying to resist him, but failed to do so.

 

 

Most of the people ignored the act, and those who noticed considered it as child’s play.   This young boy made a possible reach to his genitals and was trying to seek pleasure irrespective of the resistance, which gave a gist of his intentions. I didn’t understand whether the mother was ignoring it or didn’t want to admit the act. Lately I realised that she possibly didn’t understand that it was an abuse.
I wanted to raise my voice against it but, was scared of the crowd. I wasn’t sure about the public’s reaction . This incident made me think of several questions. Was this happening for the first time? If yes, what would happen to that little girl in future getting abused by her own elder brother? What about the thought running at this tender age? How was he misled? How come no one from the family ever noticed such act? If this is just the case of one family, could be a similar cases of other families? Can such things encourage small underage boys to do heinous acts such as rape? What is the solution? I kept thinking, I should have raised my voice, told the mother, but I didn’t. I just didn’t. What you would have done in such situation?

One thing is for sure charity begins at home but crime too!!

 

By

Kevin Lodha, M.Tech-Petroleum Engg.

IIT (ISM) Dhanbad.

POCSO – Protection of Children from Sexual Offences.

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Child sexual abuse has been a hidden problem in India, largely ignored by the people and also the criminal justice system. It was not until recently that child sexual abuse has been acknowledged as a criminal offence. Crimes against children such as child sexual assault (not accounting to rape), exploitation and harassment for pornography were never legally sanctioned.

The Ministry of Women and Child Development started a campaign which led to the enactment of a new legislation called the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) in 2012. Till 2012 the only sexual offences which were recognized by the law were rape, outraging modesty of women and anal sex, homosexuality or bestiality.

According to this act definition of child sexual abuse includes the following: penetrative sexual assault, aggravated penetrative sexual assault, sexual assault, aggravated sexual assault, sexual harassment, using child for pornographic purpose and trafficking of children for sexual purposes. This Act also addresses attempts to commit a sexual offence, and the abetment of sexual offences against children.

POCSO does not confine to penetrative sex to penile penetration and rape. Instead, it broadens the offence termed ‘penetrative sexual assault’ and also includes oral sex and insertion of any object into anus, mouth or vagina. This includes sexual assault committed by persons in authority or position of power with respect to a child, committed by persons in a shared household with the child. POCSO is quite modern with respect to many issues, such as, the definition also includes sexual harassment with repeated following, watching or contacting a child either directly, electronically or through other means, covering incidents of child harassment via sexting or sexual cyber bullying.

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This act protects children (defined as those below 18 years) from these offences. Setting up of special court, child friendly atmosphere through all stages of the judicial process, from reporting, recording of evidence, investigation, trial in-camera and without revealing the identity of the child.

The punishment prescribed in this act may include a fine, as well as payment of compensation to the child for trauma suffered and for rehabilitation, as necessary; imprisonment for a variable term and can extend up to a maximum of life imprisonment, depending on the gravity of the offence. However, controversial thing is it contains an extraordinary clause (Chapter VII, Clause 29) which states that the accused person is guilty unless proven innocent.

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The number of child sexual abuse cases have been increasing rapidly, it is of utmost importance that these laws are taken seriously. Government has made a substantial contribution in educating the people, sensitizing the criminal justice system, and making the reporting of child sexual abuse compulsory. POCSO 2012 has been a positive step and has made a significant contribution to tackling the problem of child sexual abuse in India. It has identified and criminalized a range of unacceptable sexual behaviors that pose a threat to children.

Shruti

Good Touch, Bad Touch

A quite (in)sensitive world we live in, which makes it imperative to foster a healthy mind-set in the budding minds. With the increasing malicious and damaging nature of people or specifically men, crime rate is rising exponentially. Common victims for the offenders are children, old people who can’t thwart and women who can be overpowered (in terms of strength) (no intention of discrimination). Toddler cases have been upsurging lately with daily reports of sexual harassment and child rapes in various cities. This serves as an impetus for the society for the rapid changes to be brought in the upbringing of the next generation kids.

Generally, people aren’t aware what needs to be done when they become parents. Whatever knowledge new parents have is from their previous generation. I feel too young to comment on “Parenting”. Still, after a thorough research on the internet, the best practices to be adopted should be in the following lines:-

  • Making them aware about their body at a young age (2 years old).
  • Teaching them basic anatomy.
  • While bathing them, rule should be – no one touches their private parts covered by undergarments.
  • Fathers should avoid bathing their daughters around the age of 8-10.
  • Making them realize you are always there to listen to any problems they’ll face, thus nurturing candid relationship.
  • Inculcate the right to say ‘no’ if they are uncomfortable about any bad touches.
  • Good touch – hugs and kisses from mommy, father, grandparents.
  • Bad Touches – holding tightly, kissing on the lips and touching the private parts, taking them to the washroom without parental guidance.

Note – Children should know that even relatives can fall in any category, so it’s better to communicate. Also, you need to educate them time to time, it’s a continuous process.

While you practice these regular habits as your child is growing up, until he/she is older than 5 years of age, more specific habits could be –

  • Making them believe they are the soul owners of their body
  • Quite famous ‘Swimsuit Rule’- whatever is covered by a swim suit is private and no one is allowed to touch that.
  • Teaching these safety habits
    1. Do not touch other person’s private body parts and vice versa.
    2. Do not allow any person to take your clothes off or click pictures/videos.
    3. Do not see naked photos/videos.
    4. Say no/Call for help/scream/run away fast from the place of bad touches.
    5. Always share these with parents and trusted adults.
    6. Parents should avoid changing clothes in front of the kids.

This outlays some basic habits to be followed. Its delivery depends upon your communication with your child. Happy Parenting

Lavish Garg

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